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हिन्दी के लिए धीमा जहर: ‘हिंग्लिश’!

Posted On: 28 Sep, 2013 Contest में

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हिन्दी के लिए धीमा जहर: ‘हिंग्लिश’!


यह सच है कि हिन्दी ब्लॉगिंग ‘हिंग्लिश’ स्वरूप को अपना रही है। जहां तक इससे हिन्दी के वास्तविक रंग-ढ़ंग को बिगाड़ने या इससे हिन्दी को व्यापक स्वीकार्यता मिलने का प्रश्न है तो इसके परिपेक्ष्य में कई पहलूओं को देखने की आवश्यकता है। दरअसल यह ‘हिंग्लिश’ हिन्दी व अंग्रेजी शब्दों का मिलाजुला मिश्रित रूप है। लेकिन, यह नया रूप हिन्दी भाषा के लिए ‘धीमे जहर’ का काम कर रहा है, इसमें कोई दो दाय नहीं होनी चाहिए। निश्चित तौरपर इससे हिन्दी के हितों को न केवल जबरदस्त आघात लग रहा है, बल्कि हिन्दी का यह हा्रस उसके अस्तित्व को भी खतरे में डाल सकती है। बड़ी विडम्बना का विषय है कि भूमण्डलीकरण के इस दौर में सैंकड़ों भाषाएं भारी संक्रमण के दौर से गुजर रही हैं। वैश्विक भाषाओं के मूल अस्तित्व पर ‘ग्लोबिश’ भाषा का ग्रहण लगने लगा है। ‘ग्लोबिश’ ऐसी भाषा जिसमें इंग्लिश के उतने ही शब्द इस्तेमाल किये जाते हैं, जिससे पूरी दुनिया का काम चल जाए। ‘ग्लोबिश’ में मात्र डेढ़ हजार ऐसे इंग्लिश शब्द प्रयुक्त हो रहे हैं, जिन्हें सीखकर कथित तौरपर पूरी दुनिया में अंग्रेजी में सहज संवाद स्थापित किया जा सकता है। फ्रांस, कोरिया और स्पेन आदि में इन दिनों ‘ग्लोबिश’ भाषा ने धूम मचाई हुई है और स्थानीय भाषाओं की जड़ें हिलाई हुई हैं।


वैश्विक स्तर पर जहां ‘ग्लोबिश’ अपने पाँव बड़ी तेजी से पसार रही है, वहीं चीन मंे ‘चिंग्लिश’ चीनी भाषा के लिए चिंता और चुनौती का सबब बनी हुई है और भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी ‘हिंग्लिश’ का शिकार हो गई है। ‘ग्लोबिश’, ‘चिंग्लिश’, ‘हिंग्लिश, ‘फिंग्लिश’ आदि मिश्रित/संकर श्रेणी की भाषाओं के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनिया की कुल 6900 भाषाओं में से 3500 भाषाएं विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 फरवरी, 2009 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ के अवसर पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक इनमें सबसे गंभीर स्थिति भारत की है, जहां 196 भाषाएं विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी हैं। इसके बाद अमेरिका का स्थान आता है, जिसकी 192 भाषाओं पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। गतवर्ष सितम्बर, 2011 में राज्यसभा में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डी. पुण्डेश्वरी ने लिखित जवाब में जानकारी देते हुए बताया था कि भारत में पिछले छह दशकों के दौरान नौ भाषाएं विलुप्त हो चुकी हैं और 103 लुप्त होने की कगार पर हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि देश में 84 भाषाएं ऐसी हैं, जिनको बोलने वालों की संख्या मंे निरंतर गिरावट आ रही है। सरकार इन भाषाओं के निरंतर संरक्षण के लिए प्रयासरत है। ऐसे में सबसे गंभीर सवाल यही उठता है कि क्या ‘हिंग्लिश’ के कारण हिन्दी का भी ऐसा ही हश्र हो सकता है?


यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि वैश्विक स्तर पर तेजी से पाँव पसार रही हिन्दी एकाएक ‘हिंग्लिश’ के भयंकर संक्रमण का शिकार हो गई है। हिन्दी को वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्थापित करने, रोजगारदायक बनाने, विश्व स्तरीय श्रेष्ठ साहित्य को हिन्दी मंे उपलब्ध करवाने, साहित्यकारों को मान-सम्मान देने जैसे अनेक हिन्दी समृद्धि के अचूक लक्ष्य निर्धारित किये गये। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए चल रहे सतत संघर्ष के बीच ‘हिंग्लिश’ ने सभी रास्तों को एकदम संकरा और जटिल बना दिया है। अब हिन्दी के समक्ष ‘हिंग्लिश’ सबसे बड़ी विकट चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। सरकारी तंत्र से लेकर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ मीडिया तक, बॉलीवुड से लेकर गाँव की गलियों तक और आम आदमी से लेकर बुद्धिजीवियों के एक बड़े धड़े तक ‘हिंग्लिश’ का बोलबाला स्थापित हो चुका है। ऐसे में हिन्दी पर ‘हिंग्लिश’ का हमला कितना घातक सिद्ध हो सकता है, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। चुंकि, हिन्दी हिन्द की राष्ट्रभाषा है तो हर हिन्दुस्तानी का यह नैतिक फर्ज बनता है कि वह हिन्दी के हित में अपना समुचित योगदान दे। हिन्दी को सरल तो बनाया जाए, लेकिन हिन्दी के हितों को ताकपर रखकर नहीं। हिन्दी के विद्वान व विदुषियों को आगे बढ़कर ऐसा रास्ता निकालना अथवा सुझाना चाहिए, जिससे ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे।’


जहां तक ब्लॉगिंग के दौरान हिन्दी कन्वर्टर के इस्तेमाल का विषय है तो यह हिन्दी के लिए नुकसानदायक नहीं है। यह तो देवनागरी लिपि को हिन्दी यूनिकोड में बदलकर हिन्दी प्रेमियों के लिए सहायक सिद्ध हो रहा है। हिन्दी शब्दों को मिश्रित/संक्रमित भाषा में बदलना हिन्दी के लिए सबसे बड़ी चिंता और चुनौती का विषय है।



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santlal Karun के द्वारा
September 28, 2013

“दरअसल यह ‘हिंग्लिश’ हिन्दी व अंग्रेजी शब्दों का मिलाजुला मिश्रित रूप है। लेकिन, यह नया रूप हिन्दी भाषा के लिए ‘धीमे जहर’ का काम कर रहा है, इसमें कोई दो दाय नहीं होनी चाहिए।” आप का यह कथन अत्यंत विचारणीय है:हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    rkk100 के द्वारा
    October 1, 2013

    परम आदरणीय संतलाल करूण जी, आपकी अमूल्य प्रतिक्रिया एवं शुभकामनाओं के लिए तहेदिल से शुक्रिया।

nishamittal के द्वारा
September 28, 2013

हार्दिक बधाई और आभार उपयोगी जा नकारी हेतु

    rkk100 के द्वारा
    October 1, 2013

    परम आदरणीया, आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए तहेदिल से आपका धन्यवाद एवं आभार।

yatindranathchaturvedi के द्वारा
October 2, 2013

हिंदी भारत की आत्मा है

    rkk100 के द्वारा
    October 11, 2013

    बिल्कुल दुरूस्त फरमाया है यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी जी। प्रतिक्रिया के लिए अत्यन्त आभार।

ushataneja के द्वारा
October 3, 2013

राजेश कश्यप जी, शॉर्टलिस्टेड प्रतिभागियों की सूची में नामित होने के लिए बधाई|

    rkk100 के द्वारा
    October 11, 2013

    तहेदिल से आभार एवं धन्यवाद ऊषा तनेजा जी। आप भी शार्टलिस्टेड सूचि में आप भी शामिल हैं। आपको भी हार्दिक बधाईयां और शुभकामनाएं। आप सबके साथ अपना नाम देखकर अत्यन्त गर्व की अनुभूति हो रही है। आप सबका बेहद शुक्रगुजार हूँ। पुनः आभार एवं धन्यवाद है।


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