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हिन्दी पखवाड़ा: दिखावे में भी दम है!

Posted On: 25 Sep, 2013 Contest में

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हिन्दी दिवस पर ‘पखवाड़ा’ के आयोजन का कोई औचित्य है या बस यंू ही चलता रहेगा यह सिलसिला?


हिन्दी पखवाड़ा: दिखावे में भी दम है!


प्रतिवर्ष हिन्दी पखवाड़ा प्रतिवर्ष 1 से 14 सितम्बर तक देशभर में मनाया जाता है। पहले की अपेक्षा अब हिन्दी पखवाड़ा मनाने की परंपरा कुछ ज्यादा ही चल पड़ी है। निःसन्देह यह हिन्दी के प्रति बेहद सम्मान और गौरव की बात है। कुछ विद्वान एवं विदुषियों का मानना है कि यह सब आयोजन महज एक औचारिकता भर ही है और यह सिलसिला बस यूं ही चलता रहेगा। इस तरह की मानसिकता रखने वाले लोग संभवतः अति महत्वाकांक्षी हैं या फिर अल्पज्ञानी। अति महत्वाकांक्षी इसीलिए कि हो सकता है कि ऐसी सोच रखने वाले लोग हिन्दी को उस ऊंचाई पर तत्काल देखना चाहते हों, जिस ऊंचाई पर आज हिन्दी को होना चाहिए। उनकीं यह भावना अति सम्माननीय एवं वन्दनीय है।


हिन्दी पखवाड़े के आयोजन की महत्ता न समझने वाले हिन्दी प्रेमियों एवं शुभचिन्तकों को अल्पज्ञानी इसीलिए कहा जाना चाहिए कि जो मुकाम हिन्दी को स्वतंत्रता के साढ़े छह दशक बीत जाने के बावजूद नहीं मिला और कहीं न कहीं उसमें गिरावट आई है तो भला वो मुकाम एक ही झटके में कैसे मिल सकता है। इसी सन्दर्भ में एक हिन्दी की कहावत है, ‘हथेली पर सरसों नहीं उग सकती’ यदि हरियाणवी अन्दाज में कहा जाए तो ‘गादड़ की तावल में बेर कोन्या पाकैं’ अर्थात, यदि गीदड़ यह चाहे कि बेर (फल) अभी पक जाएं और वह अभी उन्हें खाकर अपनी भूख मिटा ले तो ऐसा संभव होने वाला नहीं है। गीदड़ की जल्दबाजी में बेर नहीं पका करते। वे तो समय आने पर ही पकते हैं।
यह बात सही है कि साढ़े छह दशक का समय कम नहीं होता और अब हिन्दी को उसका वास्तविक ओहदा अभी तक नहीं मिल पाया है। ‘ऐसा क्यों नहीं हुआ’? इसका कौन जिम्मेदार है? इस तरह के सवालों की समीक्षा हर किसी हिन्दी प्रेमी व शुभचिन्तक को करनी ही चाहिए और उसी के आधार पर आगामी गतिविधियां तय करनी चाहिएं। लेकिन, इसके साथ ही हिन्दी के सम्मान एवं हिन्दी के नाम पर होने वाले हर आयोजन का खुले दिल से स्वागत करना चाहिए और उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। ऐसा क्यों?


इस सवाल में बहुत बड़ा भेद छुपा हुआ है। जरा सोचिए! यदि कोई व्यक्ति, संस्थान या विभाग हिन्दी पखवाड़ा मनाता है तो वह हिन्दी के प्रति संवेदना व्यक्त करेगा। हिन्दी पर जोर देने का सभी से आह्वान करेगा। हिन्दी के विकास और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करेगा। यह कहना कदापि गलत नहीं होगा कि पहले से कहीं अधिक हिन्दी दिवस, हिन्दी सप्ताह या फिर हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रमों के आयोजन होने लगे हैं। समाजसेवी संस्थानों से लेकर, सरकारी विभागों तक और बैंकांे से लेकर, न्यायालयों तक, हर स्तर पर देशभर में हिन्दी के हित में दो शब्द अवश्य कहे जाते हैं। क्या यह हिन्दी के प्रति शुभ संकेत नहीं है?


यह माना कि इन सब आयोजनों में दिखावा होता है और सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। लेकिन, क्या यह हिन्दी के विरोधियों और दिखावा करने वालों के लिए सच की स्वीकारोक्ति नहीं है? इन आयोजनों में वे दिल से न सही जुबान से तो यह स्वीकारते हैं कि हमें हिन्दी पर ज्यादा जोर देना चाहिए, हिन्दी को उसका हक मिलना चाहिए, हिन्दी के राष्ट्रभाषा का सम्मान बनाये रखना चाहिए…वगैरह-वगैरह! वे जो शब्द जुबान से कहते हैं तो कम से कम उनके दिल और आत्मा में तो यह अपराध-बोध होगा कि वे हिन्दी के प्रति छल कर रहे हैं और कहीं न कहीं अपनी आत्मा को भी धोखा दे रहे हैं। वह धीरे-धीरे आत्म-मंथन करता है और अपनी आत्मिक आवाज को जब भी मौका मिलता है, वह बाहर निकालता है। ऐसे में क्या हिन्दी पखवाड़ा के औपचारिक आयोजन भी कहीं न कहीं हिन्दी की उन्नति के लिए सहायक सिद्ध नहीं होते हैं? यह कहना कदापि गलत नहीं होगा कि ‘‘दिखावे में भी दम है।’’ आपका क्या मानना है? जरूर बताईयेगा? आपका स्नेहाकांक्षी मित्र-राजेश कश्यप



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
September 25, 2013

सही है इस प्रकार के आयोजनोँ से हिन्दी के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।

    rkk100 के द्वारा
    September 28, 2013

    परम आदरणीय वैद्य सुरेन्द्रपाल जी, आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूँ। हौंसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

yatindranathchaturvedi के द्वारा
September 28, 2013

बेहतरीन

    rkk100 के द्वारा
    October 1, 2013

    अनमोल प्रतिक्रिया के लिए तहेदिल से आपका धन्यवाद एवं आभार।

anilkumar के द्वारा
September 30, 2013

प्रिय महोदय , आपके इस विचार में भी दम है , कि ’ दिखावे में भी दम है । ‘

    rkk100 के द्वारा
    October 1, 2013

    तहेदिल से आपका धन्यवाद एवं आभार।

sadguruji के द्वारा
October 12, 2013

आदरणीय राजेश कश्यप जी ब्लॉग मित्र चुने जाने पर बधाई.

    rkk100 के द्वारा
    October 15, 2013

    बहुत-बहुत धन्यवाद, शुक्रिया और आभार सदगुरू जी।

bdsingh के द्वारा
October 15, 2013

आपको बहुत–बहुत बधाई

    rkk100 के द्वारा
    October 15, 2013

    तहेदिल से आभार और धन्यवाद बन्धु।


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