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हिंदी के लिए ब्रम्हास्त्र...!

Posted On: 6 Sep, 2013 Contest में

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हिंदी के लिए ब्रम्हास्त्र…!

नव परिवर्तनों के दौर में हिन्दी ब्लॉगिंग


ब्लॉगिंग की दुनिया में हिन्दी का पदापर्ण बेहद सुखान्त सिद्ध हुआ है और इसके बड़े दूरगामी परिणाम निकलना सुनिश्चित हैं। ब्लॉगिंग के क्षेत्र में अंग्रेजी का वर्चस्व छाया रहता था। लेकिन, अब हिन्दी ने ब्लॉगिंग के क्षेत्र में अंग्रेजी की बादशाहत को जबरदस्त चुनौती दे डाली है। इसे हिन्दी के सच्चे सिपाहियों और हिन्दी पुत्रों की सच्ची लगन और कर्मठता कहा जाएगा। यदि ब्लॉगिंग को आधुनिक दौर में अभिव्यक्ति को ‘ब्रम्हास्त्र’ कहा जाए तो कदापि गलत नहीं होगा। निःसंदेह इस ‘ब्रहा्रस्त्र’ के बिना हिन्दी अधूरी थी। ब्लॉगिंग का ब्रम्हास्त्र हिन्दी और हिन्दी प्रेमियों के लिये एक अत्यन्त गौरवमयी उपलब्धि है।


कहना न होगा कि हिन्दी ने हर दौर में नई-नई चुनौतियों को झेला है। कभी इसके मूल स्वरूप पर ही अत्यन्त भयंकर क्रूरतम हमला हुआ तो कभी अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा होता दिखाई दिया? लेकिन, हिन्दी कभी हारी नहीं। हिन्दी आम जनमानस की आत्मिक अभिव्यक्ति का सहज माध्यम बनी रही। भले ही दुनिया में कितने ही साम्राज्यों का उत्थान-पतन हुआ, भले ही कितने ही राजाओं के तख्तोताज बदले और भले ही दुनिया में कितने ही परिवर्तनों के दौर चले हों, लेकिन हिन्दी ‘हरी दूब’ की भांति निरन्तर अपनी जड़ों को मजबूत बनाये रही और नित नये परिवर्तनों से जूझती हुई अपने अस्तित्व को अमिट और अनूठा बनाये रही।


यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि आधुनिक दौर में भी हिन्दी के समक्ष एक से बढ़कर एक चुनौतियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। अंग्रेजी मानसिकताओं ने हिन्दी को कदम-कदम पर नीचा दिखाने के कुप्रयास किया है। कहीं विज्ञान चुनौती बना तो कहीं बेरोजगारी का दंश मुसीबत बना। कहीं गंवारपन का ठप्पा लगा तो कहीं प्रतिभा के पैमाने पर फिसलन की परत चढ़ाई गई। चाहे कोई भी चुनौती रही हो, हिन्दी ने डटकर सामना किया है। इस प्रतियोगी युग में भी हिन्दी ने हर दिशा में और हर स्थिति में स्वयं को खड़ा करने एवं स्थापित करने के बेहतरीन प्रयास किये हैं।


ब्लॉगिंग की दुनिया में हिन्दी की देवनागरी लिपि को इंटरनेट पर अवतरित होने के लिये यूनिकोड लिपि के सहारे की दरकार थी, जोकि अब वह भी मिल गया है। ऐसे कई सॉफ्टवेयर और प्रोग्राम (कन्वर्टर) ईजाद हो चुके हैं, जो देवनागरी लिपि को सैकिण्डों में वैब दुनिया वाले यूनिकोड में तब्दील कर देते हैं और हिन्दी अपनी मूल लिपि में ही इंटरनेट पर पूरे गौरवमयी रूप में एक स्वर्णिम आभा के साथ प्रकट हो जाती है। हिन्दी प्रेमियों के द्वारा हिन्दी फोन्ट्स को यूनिकोड में कन्वर्ट करने वाले प्रोग्रामों के लिंक आपस में सांझा करने के साहस और सहयोग को सलाम है।


अंग्रेजीदां लोगों ने हिन्दी को इस मुकाम पर पहुंचाने के लिये ऐसी तकनीक ईजाद की, यह उनका बड़प्पन भी है और उनकीं मजबूरी भी। ‘बड़प्पन’, इसलिए कि हिन्दी को आत्मिक रूप से अपनाने वाले कभी कृतघ्नता नहीं दिखाते। यदि उन्होंने हिन्दी के लिये कोई अच्छा काम किया है तो हर हिन्दी प्रेमी दिल से उसका स्वागत करेगा और संबंधित लोगों को साधुवाद देगा। ‘मजबूरी’ इसलिए, क्योकि हिन्दी का स्वरूप असीम है। हिन्दी को जानने वाले लोग दुनिया के किसी भी देश और कोने में मिल जाएंगे। आधुनिक दुनिया पर बाजारवाद हावी हो गया है। इस बाजारवादी युग में किसी भी कम्पनी या कार्यक्रम को टिकने के लिए हिन्दी की तरफ बेबस होकर मुँह ताकना ही पड़ता है। ऐसे में हिन्दी को आधुनिकतम उपहार ‘युनिकोड-कन्वर्टर’ का उपहार देना, जहां उसकी मजबूरी है, वहीं उसकी खुशनसीबी है।


चूंकि हिन्दी का ब्लॉगिंग की दुनिया में शानदार पदार्पण हो चुका है और पूरी दुनिया उसके आगे नतमस्तक नजर आ रही है तो अब दुनिया को उसके वैश्विक रूप के सहज दर्शन होने लगे हैं। दुनिया के हर देश में हिन्दी सिखने वालों की संख्या में निरन्तर बढ़ौतरी होने लगी है। हिन्दी के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में हिन्दी के पाठ्क्रमों को मंजूरी दी रही है। कुल मिलाकर नव परिवर्तन के दौर में हिन्दी एक नया स्वर्णिम वैश्विक अध्याय लिखेगी, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। हिन्दी प्रेमियों और हिन्दी ब्लॉगरों यानी ‘हिन्दी चिट्ठागारों’ के लिए ये बेहद गर्व एवं गौरव का विषय है। हिन्दी की इस अनूठी उपलब्धि के लिए आप सबको हार्दिक बधाईयां।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
September 9, 2013

अंग्रेजीदां लोगों ने हिन्दी को इस मुकाम पर पहुंचाने के लिये ऐसी तकनीक ईजाद की, यह उनका बड़प्पन भी है और उनकीं मजबूरी भी। ‘बड़प्पन’, इसलिए कि हिन्दी को आत्मिक रूप से अपनाने वाले कभी कृतघ्नता नहीं दिखाते। यदि उन्होंने हिन्दी के लिये कोई अच्छा काम किया है तो हर हिन्दी प्रेमी दिल से उसका स्वागत करेगा और संबंधित लोगों को साधुवाद देगा। ‘मजबूरी’ इसलिए, क्योकि हिन्दी का स्वरूप असीम है। हिन्दी को जानने वाले लोग दुनिया के किसी भी देश और कोने में मिल जाएंगे। आधुनिक दुनिया पर बाजारवाद हावी हो गया है। इस बाजारवादी युग में किसी भी कम्पनी या कार्यक्रम को टिकने के लिए हिन्दी की तरफ बेबस होकर मुँह ताकना ही पड़ता है। ऐसे में हिन्दी को आधुनिकतम उपहार ‘युनिकोड-कन्वर्टर’ का उपहार देना, जहां उसकी मजबूरी है, वहीं उसकी खुशनसीबी है। बिलकुल !

    rkk100 के द्वारा
    September 9, 2013

    प्रतिक्रिया दर्ज करवाने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया योगी सारस्वत जी।

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
September 22, 2013

राजेश जी, हिंदी ब्लॉग्गिंग को ब्रहमास्त्र का नाम देकर हिंदी ब्लोगिंग के मान को बढ़ा दिया.इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं.कृपया मेरे ब्लॉग पर अपने विचार प्रेषित करें

    rkk100 के द्वारा
    September 25, 2013

    बहुत-बहुत शुक्रिया जी।


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